Jyotish classes - 1 introduction of astrologyJyotish classes - 1 introduction of astrology

ज्योतिष कक्षा कि प्रथम कक्षा में ज्योतिष शास्त्र का परिचय बताया गया है,मनुष्य के जीवन में कर्म तथा फल कि परिपक्व अवस्था का ज्ञान कराने वाले इस शास्त्र को ज्योतिष शास्त्र कहा गया है। प्रथम कक्षा के तीन भाग हैं प्रथम भाग में सौरमंडल के ग्रहों तथा उपग्रहों का परिचय है। दुसरे भाग में ज्योतिष शास्त्र के उद्गम एवं सिद्धांत तथा तीसरे भाग में प्रवर्तक एवं संहिता परिचय ।

श्री गुरुचरणकमलेभ्यो नमः गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरू साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

संसार में जीवन कि शुरुआत। भाग -1

इस ब्रह्माण्ड में जीवन कि शुरुआत बिग बैंग कि घटना से शुरू होती है। बिग बैंग की घटना किसी तारे के जीवन काल के अंतिम पड़ाव में होने वाली विस्फोट क्रिया को कहा गया है। इस घटना में बड़ा विस्फोट होता है तारे में इंधन के रूप में जलने वाली गैसों में लगातार जलने से एक बड़ा विस्फोट होता है जिसका वर्ग क्षेत्रफल लाखों किलोमीटर का होता है और इस घटना में अग्नि के बड़े-बड़े पिंड ब्रह्मांड में फैल जाते हैं और अपनी अपनी कक्षाओं में अपनी धुरी पर अपनी उर्जा के प्रभाव से परिक्रमा लगाने लगते हैं। इसी प्रकार अन्य पिंड छोटे बड़े आकार के अपनी कक्षाओं में व्यवस्थित रूप से भ्रमण करते है । इस अवस्था में जिन पिंडों में अग्नि बनी रहती है वह परिक्रमा लगाता रहता है और जिस पिंड की अग्नि शांत हो चुकी है वह उल्का पिंड के रूप में अनियंत्रित होकर अपनी कक्षा से बाहर हो जाता है।

You must be logged in to view this content.

अंक शास्त्र क्या है।