हल चलाने का मुहूर्त।

 

जमीन मे बीज बोने से पहले भुमि को तैयार किया जाता हैं। वर्षा ऋतु काल में मुहूर्तों पर पहले ही विचार करके मुहूर्तों को सुनिश्चित करने कि परंपरा प्राचीन काल से ही रही। प्राचीन काल से किसान नक्षत्रों का ज्ञान रखते थे । प्राचीन काल में किसान वर्षा ऋतु से पहले ही इन नक्षत्र पर विचार करके तिथियां को सुनिश्चित कर लेते थे।

हल चलाने के लिए शुभ नक्षत्र :- मूल , विशाखा, मघा, श्रवण, घनिष्ठा, शतभिषा, पुनर्वसु, स्वाती, तीनो उत्तरा,रोहिणी, चित्रा,अनुराधा, मृगशिरा, रेवती, अश्विनी, पुष्य,हस्त ।

शुभ वार:- सोमवार ,मंगलवार ,बुधवार, बृहस्पतिवार, शुक्रवार यह सभी वार शुभ हैं बीज बोने के लिए।

शुभ तिथि:- १,२,३,५,७,१०,११,१२,१३, पूर्णिमा।

वर्जित तिथि:- 4,9,14,6,8 तथा अमावस्या, होलाष्ट, श्राद्ध कि सभी तिथियो को छोड़कर सभी तिथियां शुभ है।

शुभ लग्न :- वृष,मिथुन, कन्या, वृश्चिक, धनु,मीन।

इसके अलावा पाप ग्रह बल हिन हों चंद्रमा जल राशि में हो (कर्क,मक्कर,कुभं,मीन) शुभ कारी है ।

शुक्र अस्त ना हो।

लग्न में पुर्ण चंद्रमा तथा बृहस्पति शुभफल देता हैं।

सूर्य नक्षत्र ओज्झिता द्वल चक्रन्यास से आंकलन के बाद नक्षत्र शुद्धि जरूर करें।

सूर्य नक्षत्र ओज्झिता द्वल चक्रन्यासः

जिस नक्षत्र में सुर्य वर्तमान में है उस नक्षत्र से

पहले तीन नक्षत्र अशुभ १२३ ।

उसके बाद आठ नक्षत्र शुभ ४,५,६,७,८,९,१०,११ ।

तथा उसके बाद नो नक्षत्र अशुभ १२,१३,१४,१५,१६,१७,१८,१९,२० ।

तथा उसके बाद फिर आठ नक्षत्र शुभ माने गए हैं २१,२२,२३,२४,२५,२६,२७ ।

इस विधि से नक्षत्र कि शुद्धि होती है।