पुंसवन संस्कार मुहूर्त।

द्वितीया संस्कार

पुंसवन संस्कार मुहूर्त।

शुभ नक्षत्र:- मृगशिरा ,पुनर्वसु ,पुष्य, हस्त, मूल, श्रवण।

शुभ तिथी:- सभी शुभ तिथियां।

सही समय तीसरा महिना।

शुभ वार :- रवि,बृहस्पति,मंगल।

शुभ तिथी:- शुभ तिथी होनी चाहिए।

शुभ पक्ष:- शुक्ल पक्ष हि शुभ होता हैं ।

पुंसवन संस्कार का उद्देश्य सन्तान वीर्य वति तथा स्वस्थ पैदा हों । संसार में प्रत्येक गर्भ का यह संस्कार होना चाहिए कुछ ध्यान रखने योग्य बातें।
गर्भवती स्त्री पहले दिन से ही रोज खुश रहे किसी प्रकार के शोक अथवा चिंता से दुर रहें। ओर अपने स्वास्थय तथा स्वच्छ वातावरण का पुरा ध्यान रखें । नित्य अपने पुर्वजों ,गुरू जनो तथा अपने ईष्ट का ध्यान करें ।
मलिन विकृति ,हिन भावना वाले व्यक्ति की स्पर्श ना करें । शुद्ध भोजन करें । गला- सड़ा भोजन ना करें । दुर्गन्ध वाली ,डरावनी,सुनसान जगहों पर ,वृक्ष के नीचे शमशान घाट पर ना जायें तथा अकेली घर से बाहर ना जाये।
गर्भवती स्त्री को चाहिए कि वह मन को प्रसन्न रखें,रस दार तथा पोष्टिक भोजन करें। शिक्षा प्रद कहानियां एवं महापुरूषों कि जीवन शैली को पढें। इस समय गर्भ में मस्तिष्क का निर्माण शुरू हो जाता है। अपने स्वभाव को शांत रखें। इस संस्कार से संबंधित अधिक जानकारी हेतु संपर्क करे।