इस संस्कार का प्रयोजन बच्चे को माता से अलग तथा पालने में सुलाना है गृहस्थी में बच्चे कि देखभाल करने कि जिम्मेदारी घर के अन्य सदस्यों कि भी होती और इसी दिन उसकी देखभाल करना घर के अन्य सदस्यों कि शुरुआत हो जाती है। इस दिन बच्चे को मां से अलग सुलाने की शुरुआत होती है।
शुभ नक्षत्र:- अश्विनी,रोहिणी,मृगशिरा,पुष्य,उत्तराफाल्गुनी,उत्तराषाढा,उतरभाद्रपद,हस्त,चित्रा,अनुराधा,रेवती।
शुभ वार:- रविवार,बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार।
शुभ तिथि :- रिक्ता(4,9,14) अमावस्या वर्जित है इसके अतिरिक्त अन्य तिथियां शुभ हैं।

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