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ज्योतिष शास्त्र को वेदों का नेत्र कहा गया है। मनुष्य के जीवन में समय के आवरण कि पहचान करना ज्योतिष शास्त्र है। समय के तीनों काल खण्ड भूतकाल, वर्तमान काल और भविष्य काल के बारे में अवगत कराता है ज्योतिष शास्त्र।भारत में इस विद्या का अध्ययन शुरू से ही गुरुकुलों में कराया जाता था लेकिन मध्यकाल में गुरुकुल परंपरा जबसे समाप्त हुई है यह सिर्फ कुछ क्षेत्रों में बनकर रह गया था। आज के परिवेश में यह ज्ञान केवल सिमीत स्थानों तक सीमित बन कर रह गया है। लेकिन मैं आपके लिए ज्योतिष शास्त्र को सरलतम रूप में लेकर आया हूं। पाठ्यक्रम में ज्योतिष शास्त्र के अद्भुत तथा रहस्यमय ज्ञान को सरलता से समझाया गया है। यह पाठ्यक्रम कम समय में पढ़ा था सकता है और पूर्ण अध्ययन किया जा सकता है।