चौलकर्म (मूण्डन)संस्कार मुहूर्त।

चौलकर्म मुहूर्त बच्चो के लिय होता है इसके अलावा क्षौर कर्म (बाल कटवाना)कब नही करवाना चाहिए ।
संध्या के समय
रात्री के समय
भोजन के बाद में
युद्ध में तथा वर्जित तिथि, वारो में

प्रचलित नाम के अनुसार कोई ग्रह लग्न से आठवां नही हों ।
चंद्रमा ६,८,१२ नही होना चाहिए।

अगर माता गर्भिणी हो तो मुण्डन नही करना चाहिए।

(नारद संहिता :- अत्यंत विकराल होकर आभूषण धारण करके तथा स्वारी पर बैठकर क्षौरकर्म नही करवाना चाहिए। राजा को नोवे तथा पांचवे दिन क्षौरकर्म नही करवाना चाहिए। क्षौरकर्म करवाने के योग्य नक्षत्रों मे क्षौरकर्म करवाना चाहिए।

मांगलिक, जन्मोत्सव,राजा, ब्राह्मण ,बैद्य कि आज्ञा से, यज्ञ ,अनुष्ठान, मरण, कैद से छुटने पर विवाह इन्हों विषयों पर संपूर्ण तिथि वारों में क्षौरकर्म करा लेवे कुछ मुहूर्त ना देखें ।) शुरू वात में चोटी ना रखें ।सबसे पहले का मूडन पुरे बाल कटवाये । बाद में शिखा रखने का विधान हैं ।

मूंडन संस्कार के बाद स्नान जरूर कराएं।

चंद्रमा विचार:- चन्द्रमा ६,८,१२ नही होना चाहिए। ये सभी विचार प्रचलित नाम से भी किय जा सकते हैं । जन्म कुडली के अनुसार गोचर तथा लग्न से कोई भी ग्रह अष्टम स्थान में नही होना चाहिए।

शुभ नक्षत्र:- अश्विनी,मृगशिरा,पुनर्वसु,पुष्य,हस्त,चित्रा,स्वाती,ज्येष्ठा,श्रवण,घनिष्ठा,शतभिषा,रेवती।
शुभ वर्ष:- २,३,५ वां वर्ष शुभ होते हैं ।
शुभ मास:- माघ मास ,बैशाख मास, ज्येष्ठ मास,आषाढ मास,चैत्र मास।
सुर्य उत्तरायण मेॆ हो गुरू तथा शुक्र अस्त ना हो इसका विशेष ध्यान रखें ।
तिथि विचार:- २,३,५,७,१०,११,१३ तिथियां शुभ होती हैं ।
इस संस्कार में एका गर्ल दोष वर्जित माना गया है।

शुभ वार :- शुक्र,बुध,बृहस्पति,सोम वार ये शुभ वार हैं ।

सुरूआत में गुरूवार को निषेध नही हैं बाद में गुरूवार को बाल कटवाने निषेध ।
सनातन परम्पराओं में बाल किसी देव,या कुलदेव को समर्पित किये जाते हैॆ ।
पहली बार के बाल देव को अर्पित करने के लिए बढ़ाए जाते हैं उसे झड़ुला भी कहा जाता है।
इसके लिए अपने इष्ट के स्थान पर जाकर इष्टदेव के महोत्सव तथा विशेष दिन निश्चित करके यह संस्कार किया जाता है।
लग्न विचार :- शुभ लग्न होना चाहिए।