गृह प्रवेश मुहूर्त का प्रयोजन है जब भवन पुरी तरह से बनकर तैयार हो जाता है तो उसमें रहने के लिए पहले अपने इष्ट देव, ग्राम देव अपने पूर्वजों तथा वास्तु देवता का आहवान करके उनका आशीर्वाद लेकर घर में प्रवेश किया जाता ।
चंद्रमा विचार :- गृह प्रवेश करते समय गृह स्वामी के नाम से चंद्रमा 4,6,8,12 नहीं होना चाहिए।
नक्षत्र विचार :- चित्रा तीनों उत्तरा तथा रोहिणी इन नक्षत्रों को छोड़कर सभी नक्षत्र शुभफलदाई है।
मांस विचार:- अधिक मास , मलमास श्राद्ध पक्ष होलष्टक आदि निषेध हैं।उत्तरायण में; ज्येष्ठ, माघ, फाल्गुन तथा वैशाख इन महीनों में गृह प्रवेश मुहूर्त शुभ माना जाता है इसके अलावा जो मांस गृहारंभ में लिए जाते हैं वही मास यहां भी प्रयोग किए जाते हैं।
तिथि विचार :- चतुर्थी,षष्ठी, अष्टमी, नवमी,द्वादशी , चतुर्दशी तिथियों को छोड़कर बाकी सभी उत्तम है।
योग विचार:-
वार विचार :- बुध, बृहस्पति,शुक्र और शनि इन वारों में गृहप्रवेश का करना शुभदायक होता है ।
सूर्य सम्मुख दिशा विचार
कुंभ चक्र विचार :-
ग्रह अस्त उदय विचार :- गृह प्रवेश के समय सूर्य, चंद्रमा, शुक्र बृहस्पति, मंगल अस्त नहीं होने चाहिए।
स्वर विचार :- गृह प्रवेश करते समय सूर्य स्वर चलना चाहिए।
लग्न विचार एवं लग्न शुद्धि :- तीसरे, छठे, दसवें और ग्यारहवें स्थान में समस्त ग्रह शुभफल-दायक तथा त्रिकोण (६।५) या केन्द्र (१।४।७।१०) में स्थित शुभग्रह ही शुभ फलदायक होते हैं ।स्थिर लग्न में लग्नेश हो, धन, कोण, केन्द्र, पराक्रम तथा लाभ इन स्थानों में शुभग्रह हों, तीसरे, छठे और ग्यारहवें स्थानों में पाप ग्रह हों, चतुर्थ तथा अष्टम स्थान शुद्ध हों, तो ऐसे मुहूर्त में गृहप्रवेश का करना शुभदायक होता है ॥ ११५ ॥
जब तक घर का निमाण कार्य पूरी तरह से पूरा ना हो तब तक प्रवेश नहीं करना चाहिए । घर में प्रवेश करने से पहले अपनी क्षमता के अनुसार प्रसाद का वितरण जरूर करे प्रसाद का वितरण अपने घर पर बैठकर ही करे इससे भूमि को भोग लगता है। इस दिन घर पर आए सभी से आशीर्वाद ग्रहण करें।
इस दिन घर कि महिला अपने पुराने घर से पानी का मटका लेकर नये घर में लाने का प्रावधान है। गृह प्रवेश के समय मुख्य महिला को मासिक धर्म नहीं होना चाहिए।
अगर इसी दिन हवन का आयोजन है तो अग्नि का वास जरूर देखें। गृह-प्रवेश मुहूर्त में इन सभी स्थितियों पर विचार किया जाता है।
क्षेत्रीय परम्पराओं में अधिकतर बदलाव देखने को मिलते हैं भवन निर्माण पुरा होने से पहले ही घर में प्रवेश कर लेते हैं यह अनिष्टकारी होता है। पुरी तरह से निर्माण होने पर ही घर में प्रवेश करें।

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