औषधि बनाने और ग्रहण करने का मुहूर्त।

शुभ नक्षत्र:-अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त,चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल,श्रवण, धनिष्टा, शतभिषा, रेवती ।

जो औषधियां नक्षत्रों के उपचार के लिए बनाई जाती है उनमें सभी नक्षत्रों को लिया जाता है।

शुभ तिथि:- रिक्ता(4,9,14),अमावस्या  को छोड़कर अन्य तिथि शुभ हैं।

शुभवार:- शुक्र वार शुभ है।

लग्न’- द्विस्वभाव शुभ हैं।