जब मनुष्य प्राय अपना घर बनाता है तो उसके मन में एक सवाल आता है कि नया घर कोन से महिने में बनाना शुरू करें जिससे सुख समृद्धि और शांति हमेशा घर पर बनी रहे।
पृथ्वी पर भवन निर्माण तथा अन्य विषयों पर निर्माण के लिए जब समय अनुकूल होता है उसी समय भवन निर्माण करना लाभकारी होता है इसका आकलन हमारे सनातन संस्कृति में चंद्र मास तथा सूर्य मास के अनुसार किया जाता है जैसे चंद्रमा की गति के अनुसार निर्मित मांस और सूर्य कि सक्रांति के अनुसार बनने वाले मास भी प्रचलित हैं। सूर्य और चंद्रमा कि गति से बनने वाले विशेष योगों में निर्माण कार्य शुरू करना चाहिए।
नारद मत:- मार्गशीर्ष, फाल्गुन, वैशाख, माघ, श्रावण, और कार्तिक मास मे नव निर्माण स्वास्थ्य तथा पुत्र लाभ देता हैं।
ज्योतिष शास्त्र में किसी कार्य को करने के लिए समय कि अवधि कि अनुकूलता एवं प्रतिकूलता पर प्राचीन काल से ही ध्यान दिया गया है। पृथ्वी के आवरण में हमारा जीवन सूर्य और चंद्रमा से प्रभावित होता और उनकी गति के अनुसार ही जीवन में हर कार्य के लिए समय को सुनिश्चित किया जाता है हमारे ऋषि मुनियों द्वारा इनकी गति को पहचान कर उनमें समय का चयन मुहूर्त के रूप में किया गया है और इन समय कि अवधियों में जिन कार्यों को करने से लाभ मिलता है उन्हीं को करने के लिए कहा गया है और जिन कार्यों को करने से हानि होती है उन कार्यों को करने के लिए निषेध बताया गया है।
प्रकृति के अनुसार प्रत्येक कार्य का एक समय सुनिश्चित होता है। क्योंकि किए गए कार्य से भी प्रकृति के एक आवरण का निर्माण होता है। हमारे ऋषि-मुनियों ने अपने दिव्य ज्ञान से प्रत्येक कार्य को करने के लिए समय कि पहचान कि हुई है।
आज के भौतिक सुखों कि प्रधानता वाले समय में इन नियमों को अनदेखा तो कर दिया जाता है लेकिन बने हुए घर में केवल सुंदरता मात्र होती है सुख एवं समृद्धि और शांति नहीं होती।
वास्तु शास्त्र में निर्माण के नियमों जितना ही प्रभाव शाली होता है समय का निर्णय। इस संसार में कोई भी कार्य अपने पूरे परिणाम के लिए किया जाता है । ओर इसके लिए समय और स्थिति स्थान का पुरा ध्यान रखा जाता है।
नीचे लिखे गए मांस अनुसार फल यह हमारे शास्त्रों में वर्णित है। इनका ध्यान रखने पर हमें सुख समृद्धि और शांति का लाभ मिलता है। हमारे वैदिक सिद्धांतो के प्रति विपरीत तर्क देने वाले बहुत हैं लेकिन उनके बारे में जानकारी रखने वाले बहुत कम है।
नव निर्माण के लिए शास्त्रों में मास के अनुसार मिलने वाले परिणामों पर विचार करना चाहिए।
चैत्र मास मे नया निर्माण शोक देता है।
बैशाख मास मे धान्य कि वृद्धि होती है।
ज्येष्ठ मास मे कष्टदायक होता हैं।
आषाढ़ मास मे पशु हानि होती हैं।
श्रावण मास मे द्रव्य लाभ देता हैं।
भाद्रपद मास में दरिद्रता कारी।
अश्विन मास मे कलह कारी।
कार्तिक मास मे भृत्यो का नाश।
मार्गशीर्ष मास मे धान्य कि वृद्धि।
माघ मास मे अग्नि भय।
फाल्गुन मास मे श्री लाभ।
क्षय मास,अधिक मास दोनों निषेध है
मास अनुसार फल हमारे ऋषि मुनियों के द्वारा अनुभव करके वर्णित किए गए हैं इनके फल आजके परिवेश में ध्यान करके उपयोग में लेने चाहिए।
नारद मत:- मार्गशीर्ष, फाल्गुन, वैशाख, माघ, श्रावण, और कार्तिक मास मे नव निर्माण स्वास्थ्य तथा पुत्र लाभ देता हैं।
इन महिनों का आंकलन आप सूर्य कि स्थिति के अनुसार भी निश्चित कर सकते हैं। वास्तु शास्त्र के लेखों में किसी किसी जगह सूर्य संक्रांति के अनुसार भवन निर्माण के फल कहें है सूर्य सिद्धांत के अनुसार बनने वाली स्थिति प्रमुख होती है इस लिए सूर्य संक्रांति के अनुसार ही नींव दिशा का निर्धारण किया जाता हैं और संक्रान्तियों के अनुसार ही नींव स्थापना मुहूर्त का निर्धारण किया जाता है।।
धरती जागृत एवं शयन अवस्था।2025
