jyotish-class-12-nakshtara-upchar paddatijyotish-class-12-nakshtara-upchar paddati

उपचारीय ज्योतिष में व्यक्ति कि जन्म कुंडली में जो नक्षत्र पीड़ीत होता है उस नक्षत्र कि पुजा करने का विधान है और जन्म नक्षत्र के प्रतीक धारण करने कि परम्परा भी उपचारीय ज्योतिष का हिस्सा है। प्राचीन काल में इन उपायों से ही दोषों का निवारण किया जाता था।
मूल नक्षत्र में जन्म होने पर दोषों का निवारण नक्षत्रों से संबंधित वृक्षों की पूजा करके किया जाता है।
जन्म नक्षत्र के अनुसार वृक्षारोपण भी उपचारीय ज्योतिष का हिस्सा रहा है।

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सृष्टि निर्माण के देव विश्वकर्मा जी ।