Jyotish Class - 9 panchak prichayJyotish Class - 9 panchak prichay

पंचक शब्द का शाब्दिक अर्थ है पांच गुणा क्षमता।पंचक शब्द का प्रयोग चंद्र मास में पड़ने वाले अंतिम पांच नक्षत्रो के लिए किया जाता है धनिष्ठा, उत्तरार्ध, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपदा, उत्तराभाद्र- पदा, रेवती इन नक्षत्रों को पंचक कहते हैं।

पंचक नक्षत्रो कि समयावधि में प्रेत दाह, घास तथा लकड़ी का इकट्ठा करना तथा शैय्या का बनवाना,नव निर्माण में छत डालना वर्जित है । पंचको में हानि, लाभ तथा व्याधि पांच गुना, त्रिपुष्कर में तिगुना, द्विपुष्कर में दोगुना होती है । पंचक नक्षत्रो में दाह संस्कार को भी वर्जित माना गया है,इस लिए पंचक नक्षत्रो में दाह संस्कार के साथ साथ पंचक पुजा भी करवाई जाती है। पुजा यह पंचक नक्षत्रो कि शांति के लिए करवाई जाती है।
पंचक नक्षत्र
धनिष्ठा का उत्तरार्ध (तृतीय व चतुर्थ चरण ), शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती ।
 कुल १८ चरण ;  इन ५ नक्षत्रों में जब गोचर में चन्द्रमा आता है तब उस अवधि को पंचक कहा जाता है ।

You must be logged in to view this content.

यात्रा मे दिशाशूल विचार।