Jyotish Class -7 nakshtara prichayJyotish Class -7 nakshtara prichay

जो आकाश हमें दिखाई देता है इसको ज्योतिष भाषा में भचक्र के नाम से जाना जाता है और रात्रि कल में इस भचक्र में दिखाई देने वाले तारों के समूह को नक्षत्र कहा जाता है।

यह खुला आसमान 360 डिग्री का होता हैं। तारामंडल कि स्थिति हमेशा आकाश में एक जैसी ही रहती है लेकिन दिन में सूर्य के प्रकाश के कारण यह हमें दिखाई नहीं देती जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर एक हिस्से पर तब रात्रि कल में यह हमें दिखाई देते हैं।
सनातन संस्कृति में प्राचीन काल से ही समय कि ईकाइयां नक्षत्रों से परिभाषित होने लगी थी। शतपथ ब्राह्मण और तैत्तिरीय संहिता में यही क्रम मिलता है। मानव सभ्यता में बौद्धिक विकास ब्रह्मांड कि जानकारी पर आधारित है। उस समय मनुष्य कि चेतना इतनी विकसित हो चुकी थी कि वह अपनी दिनचर्या का प्रयोग ब्रह्मांड कि गतिविधियों के अनुसार करने लगा था। उदयकाल के अन्तिम भाग में नक्षत्रों के फलाफल में पर्याप्त विकास हो गया था। अथर्ववेद में मूल नक्षत्र में उत्पन्न बालक की दोष-शान्ति के लिए अग्नि आदि देवताओं से प्रार्थनाएं की गयी हैं ।

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यात्रा में चंद्रमा विचार।