उपचारीय ज्योतिष में व्यक्ति कि जन्म कुंडली में जो नक्षत्र पीड़ीत होता है उस नक्षत्र कि पुजा करने का विधान है और जन्म नक्षत्र के प्रतीक धारण करने कि परम्परा भी उपचारीय ज्योतिष का हिस्सा है। प्राचीन काल में इन उपायों से ही दोषों का निवारण किया जाता था।
मूल नक्षत्र में जन्म होने पर दोषों का निवारण नक्षत्रों से संबंधित वृक्षों की पूजा करके किया जाता है।
जन्म नक्षत्र के अनुसार वृक्षारोपण भी उपचारीय ज्योतिष का हिस्सा रहा है।
सृष्टि निर्माण के देव विश्वकर्मा जी ।
