गर्भधारण संस्कार मुहूर्त के नियम के अनुसार यह दिनांक उचित है।

1 शुभ नक्षत्र :- रोहिणी, मृगशिरा, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढा, उत्तराभाद्रपदा, हस्त, स्वाति, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा आदि गर्भ धारण में शुभ नक्षत्र कहेे गये है ।

2 चंद्रमा विचार :- किसी भी कार्य की शुरुआत में चंद्रमा कि स्थिति मुख्य नियम है। इस संस्कार में पति पत्नी दोनों कि प्रचलित नाम राशि से चंद्रमा शुभ स्थिति में होना चाहिए।

3 तिथि विचार :- गर्भ धारण संस्कार मुहूर्त के समय रिक्तता तिथियां (४,९,१४) , क्षय तिथि,अष्टमी,अमावस्या,पुर्णिमा।

4 निषेध दिवस :- विशेष पर्व , सावड़-सूत्तक , श्राद्ध, होलाष्टक, ग्रहण काल,आदि गर्भधारण मे निषेध होती हैं।

5 मास विचार :- मलमास, अधिक मास निषेध है।

6 वार विचार:- कोई भी ग्रहण कर सकते हैं ।

7 लग्न विचार :– जो सूर्यास्त से बाद में पङे वे सभी लग्न ग्रहण कर सकते हैं ।

8 स्वर विचार- दोनों जातकों में से एक कि सूर्य स्वर (नाड़ी)और दुसरे का चंद्रमा स्वर (नाड़ी)चलना शुभ स्थिति मानी जाती है।

9 ग्रहोंदय-अस्त अवस्था।
अगर ग्रहों का ध्यान रखा जाय जैसे कोई ग्रह अस्त ना हो तो सन्तान मे उस ग्रह से संबंधित विकार नही होते।
सूर्यास्त नहीं होता है। रात्रि काल में पृथ्वी कि स्थिति में परिवर्तन होता है। सूर्य अस्त नहीं होता है अन्य ग्रहों कि तरह सूर्य का प्रकाश निस्तेज नहीं होता है।

10 स्वर क्रिया का विशेष ध्यान रखने से यह उचित परिणाम देने में सहायक होता हैं ।

11 गर्भधारण संस्कार के बाद जब महावारी बंद हो जाएं उसके बाद इस क्रिया के साक्ष्य रूप में एक वृक्ष जरूर लगाएं।
गर्भाधान के समय मन कि विशेष स्थिती लाभकारी होती हैं ।
अगर इन नियमों के अनुसार विशेष योग में यह संस्कार किया जाए तो अधिक महत्वपूर्ण होता है।

इस दिनांक को गर्भधारण संस्कार मुहूर्त किया जा सकता है।

तिथिनवमी19:00:31
पक्षशुक्ल
नक्षत्रपूर्वाषाढा08:05:22
योगअतिगंड24:32:42*
करणबालव06:38:23
करणकौलव19:00:31
वारबुधवार
माह (अमावस्यांत)आश्विन
माह (पूर्णिमांत)आश्विन
चन्द्र राशि   धनुtill 14:26:14
चन्द्र राशि   मकरfrom 14:26:14
सूर्य राशि   कन्या