Earth's waking and sleeping stateEarth's waking and sleeping state

पृथ्वी की सोई हुई अवस्था में निर्माण या कोई भी प्रतिक्रिया करते हैं, तो वह परिणाम देने में भी सोई हुई रहती है। जिन घरों में या जिस जमीन पर निर्माण अधूरा रह जाता है, उसका यही कारण होता है।

बिना स्वभाव की जानकारी के ही रिश्ता जोड़ना परिणाम दुखदायक होता है।
जब व्यक्ति सोता हुआ हो तो उसकी स्वीकृति नहीं मानीं जाती। उसकी स्वीकृति उसकी जागृत अवस्था पर आधारित है ।
जब वह जागृत अवस्था में हो, तो तभी व्यक्ति कोई निर्णय ले सकता है। इसी तरह
जब भूमि जागृत अवस्था में हो तभी परिणाम शुभ फलदाई होती है।

धरती कि सोई हुई है या जागृत अवस्था है । इसका सुत्र

सूर्य संक्रांति के दिन नक्षत्र से सूर्य नक्षत्र से दिन गिने।
५ ७ ९ १५ २१ २४ वें दिन धरती कि शयन अवस्था रहती है। इन दिनों में पृथ्वी सुषुप्त अवस्था में होती है। वैज्ञानिक आधार पर है। मास की इस अवधि में धरती से निकलने वाले प्रभावों में अनुपात को देखा गया है।

जब धरती सोई हुई अवस्था में रहती है इस दिन भूमि से जुड़े कार्य निषेध हैं। इस दिन धरती में खुदाई तथा हल चलाने से संबंधित कार्य नहीं किए जाते। गृह-प्रवेश, जमीन अधिग्रहण, भवन में छत डालने तथा अन्य निर्माण कार्य कि शुरुआत निषेध है ।

धरती कि जागृत एवं शयन अवस्था

16 सितंबर से 15 अक्तूबर तक

इस महीने कि 16 सितंबर को रात्रि 1 बजकर 46 मिनट पर सूर्य सिंह राशि से कन्या राशि में जाएंगे । इस दिन से ५,७,९,१५,२१,२४ दिन धरती सोई हुई अवस्था में रहेगी।
अक्टूबर महीने 21 ,23,25,31 तथा 6,9 नवंबर को धरती सोई हुई अवस्था में रहेगी।

ऊपर दी गई जानकारी में किसी प्रकार कि त्रुटि हो तो आप मुझे अवगत अवश्य करें।

जय सिया राम।

ज्योतिष शास्त्र क्या है।