Mulank 2aur bhagyank -6 aapsi sambandhMulank 2aur bhagyank -6 aapsi sambandh

जिनका मूलांक दो और भाग्य अंक 6 हो तथा जिनकी जन्म दिनांक 26 हो इनका स्वभाव कैसा होता है ।

सर्वप्रथम तो जानते हैं भाग्य अंक और मूलांक आपस में काम कैसे करते हैं।
जन्म दिनांक से निर्मित मूलांक आपका अवचेतन मन है और भाग्यांक आपका चेतन मन है। और इन दोनों के आपसी संबंध पर ही मनुष्य का स्वभाव विकसित होता है इन दोनों अंको का मेल अगर विपरीत परिस्थिति में हो तो मनुष्य अपना जीवन विकृतियों से भर लेता है और यही उलझा हुआ रह जाता है और जिनके मूलांक और भाग्यांक दोनों के आपसी संबंध अच्छे होते हैं वे लोग हर कार्य को करने कि क्षमता रखते हैं ये रुकते नहीं है जीवन में अपने स्तर को ऊपर उठा लेते हैं।

जीवन में उन्नति और सफलता इन दोनों के आपसी संबंधों पर निर्भर करती है ।
आज हम चर्चा करेंगे जिनका मूलांक 2 और भाग्य अंक 6 हो तथा किसी भी महीने की 26 तारीख को जन्म हुआ हो।

आइए पहले तो मूलांक 2 के स्वभाव और स्वामित्व को जान लेते हैं। दो का अंक इस ब्रह्मांड में हमारे सौरमंडल में चंद्रमा ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। जिसकी स्थिति है चंद्रमा हमारी पृथ्वी का उपग्रह है और पृथ्वी पर जीवन उत्पन्न करने की कल्पना भी चंद्रमा से ही विकसित हुई है। सूर्य कि अनुपस्थिति में सूर्य के प्रकाश से पृथ्वी पर प्रकाश का कारक बनता है

व्यक्ति के शरीर में मन का कारक तथा व्यक्ति के जीवन में रिश्तों के अनुसार माता का कारक होता है।
इनका जल जैसा स्वभाव होता है। यह काल्पनिक होते हैं और जो बीज के अनुसार निर्माण करना जानते है । प्रकृति का भी यही कार्य है कि वह हमारे साथ वैसे ही व्यवहार करती है जैसा हम उसके साथ करते हैं। इस प्रकृति के निर्माण में यह पुरुष को सिद्ध करती है ।

यह किसी भी कार्य को किसी के साथ मिलकर कर सकते हैं अकेले में इनको नहीं बन पाता। जहां आवरण उनकी जानकारी में हो वहां यह खूब बोलते हैं जैसे घर पर भी यह खूब बोलते हैं सलाहकार होते हैं लेकिन बाहर यह नहीं बोल पाते। यह कहीं भी बोलते उसी के साथ हैं जो इनके अंकों के अनुसार तालमेल खाता हो वरना यह घर पर भी चुपचाप रहते हैं। जिनके साथ इनका तालमेल नहीं खाता उसके साथ तो इनका झगड़ा रहता है अपने प्रतिद्वंद्वी को भूल नहीं पाते हैं और यही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी होती है।
जैसे एक औरत का स्वभाव होता है शर्मिला और उनकी मूल प्रकृति होती है कि किसी दूसरे से पहले बात नहीं करते।

साम्राज्य में केवल एक का अंक ही इनका स्वामी होता है बाकी सब अपना-अपना काम करने वाले होते हैं तनख्वाह पाने वाले होते हैं।
अगर रानी किसी से कुछ भी लेती है और उसकी मेहनत का पैसा नहीं देती है तो उसके प्रतिद्वंद्वी मजबूत होते हैं।

इनके अंदर बोलकर काम करवाने की क्षमता अत्यधिक होती है उनके बोलने मात्र से लोग उनका काम कर देते हैं लेकिन सामने वाले को उसकी मेहनत का पैसा ना मिले तो यह आदत इनके लिए समाज में इनका सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी तैयार करती है।

अगर ये अपने अधिकारों का सदुपयोग करते हैं तो इनके अंदर जो इनकी मूल प्रकृति होती है वह सिद्ध हो जाती है। अगर यह अहंकार वंश अपने पद का दुरुपयोग करते हैं तो उनके शत्रु बढ़ जाते हैं इनकी मूल प्रकृति में है कि यह सब का ख्याल रखें और अगर यह किसी कारण वंश स्वार्थी हो जाते हैं तो उनका साम्राज्य नहीं बढ़ पाता क्योंकि रानी पुरी प्रजा की होती है न की केवल अपनी संतान की।

और सभी नौ अंकों में इनकी मित्रता केवल एक तीन पांच और अपनी जरूरत के अनुसार 7 के साथ भी मित्र जैसा ही व्यवहार करते हैं। साम्राज्य में रानी कि क्षमता राजा जैसी ही होती है। जब राजा अपने क्षेत्र से बाहर जाता है तो पूरे साम्राज्य का स्वामित्व रानी के पास होता है । और एक रानी के अंदर पालन करने कि, निर्माण करने के, कल्पना करने के तथा अपने साम्राज्य को चतुराई से चलाने के सभी गुण होते हैं इनमें साम्राज्य के लिए नया प्रतिनिधि का निर्माण करने के भी गुण होते हैं।

साम्राज्य में कभी कभार राजा का कहा हुआ पालन नहीं होता लेकिन रानी का पालन अगर नहीं होता है तो वह करवाना जानती है, अगर यह राजा के पीछे से राजा के साथ धोखा करती है तो यह अपने प्रतिद्वंदियों हार जाती है इसका मुख्य प्रतिद्वंद्वी 6 का अंक होता है । अगर इनमें चरित्र हीनता आती है तो यह 6 के अंक के आगे हार जाती हैं।

और अब जानते हैं 6 का स्वभाव और स्वामित्व।

6 का अंक इस ब्रह्मांड में हमारे सौरमंडल के शुक्र ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है।और इसकि स्थिति है यह सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार 6 का अंक दैत्यों का गुरु शुक्राचार्य को माना गया है जो के एक तरह से राक्षसों के गुरु हैं और जाहिर सी बात है कि उनकी प्रवृत्ति तामसिक है अगर यह अपनी प्रवृत्ति को बदल लेते हैं तो यह देवताओं के गुरु से भी अधिक शक्तिशाली हो जाते हैं इस प्रकृति में मनुष्य के शरीर में सप्त धातुओं का कारक माना गया है शुक्र ग्रह को चरित्र पर नियंत्रक माना गया है ।

साम्राज्य के सिद्धांत के अनुसार 6 का अंक एक तरह से पूरे साम्राज्य में प्रत्येक व्यक्ति की भौतिक जरूरत को पूरा करने के लिए जाना जाता है जैसे राजा का साम्राज्य होता है वैसे ही इनका भी एक साम्राज्य होता है।
इनके पास भी अपना एक अधिकारिक क्षेत्र होता है जहां ये अपने आवरण में भौतिक सामग्री रखते हैं।और उस सामग्री को व्यवस्थित रखने के लिए इनके कर्मचारी होते है ये कर्मचारी इनकि प्रजा होती है। अपने आधिकारिक क्षेत्र में साम्राज्य कि तरह ही कार्य प्रणाली पर कार्य करते हैं।
अपने सिमीत क्षेत्र में यह राजा होते हैं और बाकी उनकी प्रजा होती है जैसे बड़े दुकानदार होते हैं और उन दुकानों में काम करने वाले कर्मचारी होते हैं वह उनकी प्रजा होती है तो इनमें एक तरह से स्वामित्व की क्षमता भी होती है लेकिन होती है छोटी।

राजा की सभी भौतिक जरूरत तथा शारीरिक सुखों की पूर्ति भी 6 का अंक ही करता है। इसलिए 6 का अंक एक तरह से महिला मित्र को भी कहा जाता है। और राजा के साथ जो वास्तविकता में बनी हुई है वह उनकी रानी है और रानी को कभी भी यह पसंद नहीं होता कि राजा के साथ कोई दूसरी औरत रहे इसी सिद्धांत पर रानी इनकी सबसे बड़ी शत्रु होती है।

इनके अंदर पैदा करने की क्षमता नहीं होती लेकिन जो बना हुआ है उसे सुंदर रूप तथा व्यवस्थित क्षेत्र में उसका प्रयोग करना इनको अच्छे तरीके से आता है।
इनके अंदर भी नेतृत्व करने की क्षमता होती है लेकिन एक निश्चित क्षेत्र के अंदर।
यह खुले वातावरण में नेतृत्व नहीं कर पाते लेकिन एक सुनिश्चित किया हुआ क्षेत्र हो और उसके अंदर व्यवस्था को यह अपने नेतृत्व क्षमता के अनुसार अच्छा परिणाम देते हैं यह एक अच्छे प्रबंधक होते हैं।

राजा के साम्राज्य में गुप्तचर भी इन्हीं को कहा जाता है क्योंकि यह अपना कोई भी काम तथा दूसरे का भी कोई काम हो तो गुप्त रूप से करना पसंद करते हैं । इनको सजना संवरना पसंद होता तो यह वास्तविक दृश्य को सजाकर रखते हैं इस लिए जल्दी से इनको कोई पहचान नहीं पाता। इनको रूप बदलना आता है।

साम्राज्य के सभी अंकों में इनका विशेष मित्र केवल एक का अंक होता है जिसके लिए यह काम करते हैं जिससे तनख्वाह पाते हैं।
और इनका विशेष सहयोगी चार का अंक होता है। और इनकी विशेष शत्रुता मूलांक 2 के साथ होती है। मूलांक 3 भी इनसे विपरीत ज्ञान रखता है लेकिन जब इनको जरूरत होती है तो मूलांक 3 को भी मित्र बना लेते हैं। वैसे तो अंक शास्त्र का अधूरा ज्ञान रखने वाले मूलांक 3 को मूलांक 6 का शत्रु बताते हैं लेकिन तीन की जरूरत 6 पूर्ति करता है और 6 की जरूरत तीन पूर्ति करता है इसलिए अपनी जरूरत के अनुसार यह एक क्षेत्र में मित्र भी होते हैं जैसे तीन का अंक बाहरी आवरण पेड़ होता है और 6 का अंक पेड़ की जड़े होती हैं। तो ये एक दूसरे कि जरूरतों को पूरा करते हैं।

और अब बात करते हैं मूलांक 2 के साथ इनके व्यवहार कि।
मूलांक दो के साथ मूलांक 6 का तालमेल कभी नहीं बनता।
ये दोनों अंक राजा के नजदीकी अंक हैं लेकिन दोनों का आपसी संबंध शत्रुता वाला होता है।
कोई भी रानी अपनी सौतन को नहीं चाहती और कोई भी बाहरी आवरण की औरत रानी से डरती है उसका सामना नहीं कर पाती इसलिए इनका तालमेल नहीं बन पाता।
जिनकी जन्म दिनांक 26 है उनके मनस पर हमेशा यही स्थिति रहती है यह काल्पनिक भी रहते हैं और भय से भी घिरे रहते हैं जैसे कोई भी काम इनको करने के लिए कहा जाए तो यह सबसे पहले अपना पल्ला झाड़ते हैं कि पहले मुझे करके दिखाओ फिर मैं वैसा कर सकता हूं क्योंकि इनको अपनी कल्पना क्षमता पर विश्वास नहीं होता क्योंकि दो के साथ जब छह आता है तो दो के गुण भी कमजोर कर देता है वैसे 26 दिनांक से आठ का अंक बनता है यह एक अच्छा निर्णायक होता है लेकिन इस दिनांक से बनने वाले मूलांक 8 का 8 को हमेशा भ्रमित अवस्था में देखा गया है।

26 से बनने वाले मूलांक 8 में दोनों के गुण देखे गए हैं यह एक अच्छे निर्माण करता भी होते हैं और निर्माण के बाद में उस वस्तु को श्रृंगार करने में भी माहिर होते हैं लेकिन जजमेंट जब निर्णय निकलता है तब निर्णय के समय यह कंफ्यूजन इनकी भ्रमित स्थिति बनी रहती है।

और जिनका मूलांक 2 और भाग्य अंक 6 होता है यह जीवन में स्वयं की मर्जी से कुछ भी नहीं कर पाए क्योंकि यह स्वयं का किए हुए कार्यों में भी कमी निकालते रहते हैं दूसरों को दिखाने के लिए यह अपने आप को श्रेष्ठ साबित करते हैं लेकिन यह अंदर से कभी भी स्वयं पर विश्वास नहीं कर पाते इनको सेवा करनी आती है लेकिन सेवा के साथ सामने वाले पर शक भी करते हैं इसलिए इनकी की हुई सेवा का इन्हें कभी भी पूरा रिजल्ट नहीं मिलता है यह बात दिनांक 26 वाले के साथ भी होती है।
जब किसी विषय पर बात उनकी पसंद ना पसंद की आती है तो यह हमेशा भ्रमित अवस्था में रहते हैं क्योंकि दो के अंक की विशेष पहचान है उनकी पसंद होती है और यह जब 6 के साथ आते हैं तो यह और भी ज्यादा पसंद आकर्षक हो जाती है। पसंद नहीं कर पाते। फिर ये अपनी पसंद कि वस्तु अपने अनुसार किस्मत पर खरीदते हैं। और इनका स्वभाव भी ऐसी ही आदतों में ढल जाता है कि यह हर चीज की कीमत समय लगते हैं अगर उनके अनुसार सामने वाला इनको कीमत में वस्तु ना दे तो यह नहीं लेते हैं।

मूलांक 2और भाग्यांक 6 तथा 26 दिनांक वाले व्यक्तियों के गुण और अवगुण।

पहले बात करते हैं इनके गुणों की इनके अंदर किसी भी विषय पर कल्पना क्षमता तथा निर्माण के बाद सामग्री को सुंदर बनाना इनके विशेष गुण होते है यह किसी भी विषय पर कल्पना भी कर सकते हैं और उसमें अपने तरीके से कामयाबी निकाल सकते हैं। किसी भी विषय पर डर और भय कि कल्पना इनकी मुख्य कमजोरी होती है।

और इनका अवगुण है उनकी मानसिक स्थिति आपसी विरोध में अधिक रहती है यह अपने आप के सार्थक बहुत काम बन पाते हैं इसलिए उनके घाव बहुत लेट भरते हैं यह किसी भी विषय पर जल्दी से विश्वास नहीं कर पाते और यही प्रक्रिया उनके शरीर में चलती है तो दवाइयां इनको जल्दी ठीक नहीं कर पाती। किसी भी कार्य को करते समय इनको पुरी जानकारी होते हुए भी कार्य को करने का आत्मविश्वास नहीं बन पाता।

दुसरो को अपने मन में शत्रु मानने कि विशेष गलत आदत के कारण ये अपने हृदय से सभी को दूर रखते हैं। दूसरों कि जरूरतों को जानते हुए भी निजी स्वार्थ को प्रधान रखते है।और इसी कारण ये सिमीत आवरण में रह जाते हैं।

आपको यह जानकारी कैसी लगी हमें जरूर बताएं।

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TapeshwarBhardwaj
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पंचांग शोधन विधि एवं मुहूर्त निर्धारण करना सीखें।