क्या आप जानते हैं कि आपका नाम और आपकी जन्म दिनांक आपके जीवन को गहराई से प्रभावित करते हैं। अंक ज्योतिष के अनुसार हर नाम का एक विशेष अंक होता है और हर दिनांक आपके स्वभाव, भाग्य और सफलता पर असर डालती है।
नाम का प्रभाव ।
जब व्यक्ति का जन्म होता है तब उसका नामकरण उसके जन्म नक्षत्र के चरणानूसार किया जाता है।
जिस नक्षत्र चरण में चंद्रमा भ्रमण कर रहे होते हैं उसी अक्षर के अनुसार व्यक्ति का नाम रखा जाता है। और यही नाम जीवन में प्रभावी रहता है।
जब व्यक्ति कोई संस्कार करता है तो जन्म नक्षत्र के अनुसार नाम का प्रयोग करता है ।
और अगर प्रचलन में कोई अन्य नाम होता है तो यह स्थिति व्यक्ति के जीवन में भ्रमित अवस्था को पैदा करती है। व्यक्ति असमंजस में रहता है कि कोन सा नाम उसे प्रभावित करता है।
जैसे व्यक्ति का जन्म नाम कुछ और हो और प्रचलन में कुछ और हो तो यह असमंजस में डाल देता है कि कौन सा नाम हमें प्रभावित करता है ।
वास्तविकता यह है की जो नाम हमारी चेतना में होता है वही नाम हमें प्रभावित करता है। जैसे व्यक्ति सोया हुआ होता है और उसे जिस नाम से जगाया जाए और वह जाग जाए वही नाम उसकी चेतना का नाम माना जाता है । और वही नाम उसे प्रभावित करता है। क्योंकि इस संसार में आपकी चेतना काम करती है और आपकी चेतना में जिस नाम से पहचान मिली हुई है वही नाम आपको प्रभावित करता है।
आपके जन्म का नाम चाहे कुछ भी हो। क्योंकि उस नाम का प्रयोग आपने अपनी पहचान के लिए कहीं भी नहीं किया है ,तो वह केवल आपके मन में है बाहर इसका कोई प्रभाव नहीं होता।
जो नाम इस संसार में आपकी पहचान बना हुआ है और जिस नाम को आप सुनकर सोए हुए जागते हैं जो नाम आपकी चेतना में है। वही नाम आपको प्रभावित करता है।
इस लिए ध्यान रखें आपका जो नाम प्रचलित है वहीं नाम पहचान पत्र में रखें क्योंकि आपके अनेक नाम होते हैं तो वह आपको अलग ऊर्जाएं देता है और यह स्थिति हमेशा परेशानी देती है।
जो नाम आपका कागज पत्रों में पहचान बना हुआ है वही नाम आपका प्रचलन में होना चाहिए और घर का नाम भी ऐसा होना चाहिए जो आपकी जन्म दिनांक के साथ तालमेल बनाता हो अपने नाम को अच्छी तरह व्यवस्थित करके रखें क्योंकि आपके जीवन में आपका नाम ही विशेष प्रभावशाली होता है अगर आपका नाम आपकी जन्म दिनांक के अनुसार व्यवस्थित नहीं है तो आपका नाम ही आपके जीवन में विरोधाभास का कारण बनता है।
जैसे किसी व्यक्ति का नक्षत्र अनुसार नाम तुला राशि का ग्रह पर निकला है उसका नाम रमेश निकला है लेकिन किसी कारण से उसका नाम हेमंत पुकारा जाने लगा तो हेमंत के नाम से उसकी राशि मिथुन बनती है जब वह सोया हुआ हो तो हेमंत के नाम के बोलने पर वह जागृत होता है तो उसकी चेतना में उसका नाम हेमंत है जो पंचांग के अनुसार नाम उसका निकला था रमेश वह उसकी चेतना में ही नहीं है तो उसका कोई प्रभाव से नहीं मिलता।
हमारे मस्तिष्क मुख्य रूप से दो क्षेत्रों में काम करता है।
चेतन मन और अवचेतन मन
चेतन मन कि जागृत और अवचेतन मन को सोई हुई अवस्था कहा गया है। लेकिन दोनों ही जागृत होते हैं।
इनकी कार्य प्रणाली के कारण इनको ये अवस्थाएं दी गई है। जब हम पहली बार किसी व्यक्ति से मिलते हैं तो उस व्यक्ति के साथ हमारा चेतन मन कार्य करता है। व्यक्ति के द्वारा बताया गया उसका प्रचलित नाम के अनुसार ही उसकी पहचान
हमारा चेतन मन कार्य करता है ।
और जब यह व्यक्ति हमें दुबारा मिलता है तो इसके साथ हमारा चेतन मन पिछली यादों के अनुसार जो अवचेतन मन में संगृहीत हैं उसके अनुसार ही व्यवहार करता है। व्यक्ति कि पहचान जिस नाम से हमारे अवचेतन में दर्ज हुई है हम उसे उसी रूप में पहचानते हैं।
ठीक उसी तरह जो नाम हमारी चेतना में है जिस नाम से संसार के साथ जोड़ता और उसी नाम के प्रभाव मिलते हैं। अगर व्यक्ति के दो नाम प्रचलित है। जैसे एक नाम घर में पुकारा जाता है और दुसरा नाम बाहर पुकारा जाता है तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति को दुसरा
नाम भी प्रभावित करता है।
यह अवस्था व्यक्ति को दोहरे मापदंड में रखतीं हैं।
इस लिए व्यक्ति को एक ही नाम रखना चाहिए जिससे व्यक्ति प्रभावशाली रहे।
अब दूसरा प्रश्न यह है कि व्यक्ति को कोन सी दिनांक प्रभावित करती है ।
व्यक्ति को वही दिनांक प्रभावित करती है जो उसकी पहचान का माध्यम इस संसार में बनी हुई है। वैसे नियमानुसार जन्म दिनांक ही पहचान होनी चाहिए और प्राचीन काल में उसी दिनांक को पहचान मिलती थी जो वास्तविक जन्म दिनांक होती थी। क्योंकि जन्म कुंडली को ही मूल पहचान मिली हुई थी। लेकिन जब सरकारी पहचान पत्र बनना आरंभ हुआ तब से किन्हीं कारणों से वास्तविक जन्म दिनांक से अलग दिनांक पहचान पत्र में लिखी जाने लगी। और वास्तविक जन्म दिनांक का प्रयोग नहीं हो पाता।
हमें वही दिनांक प्रभावित करती है।जो हमारी पहचान बनी हुई है।
मान लीजिए आपकी वास्तविक जन्म दिनांक कुछ और है और किसी कारणवश पहचान पत्र में कुछ और है तो हमें वास्तविक जन्म दिनांक जो कहीं पर भी लिखी हुई नहीं है और नहीं हमारी पहचान बन पाई तो उसका कोई भी प्रभाव हमारे जीवन में नहीं होता हमारे जीवन में उसी दिनांक का प्रभाव होता है जो हमारी पहचान पत्र में दर्ज होती है।
यह बात अनुभव में भी है। जिस व्यक्ति कि जन्म दिनांक आधार कार्ड में भी वही है जो उसकी जन्म कुंडली में हैं तो उनके लक्षण भी मिलते लेकिन जिनकी दिनांक दोनों जगह अलग अलग है तो उनके लक्षण जन्म कुंडली से मेल नहीं खाते। शारीरिक संरचना तो मिल जाती है लेकिन वर्तमान स्थिति में ग्रह दशा के अनुसार घटना क्रम मेल नहीं खाते।
