अक्सर गृहस्थ जीवन में यह प्रश्न उठता है कि पुराने कपड़ों का क्या करें। लेकिन इस प्रकृति का नियम है कि मनुष्य अपनी आवश्यकताओं के अनुसार अपने आवरण में वस्तुओं को इकट्ठा करता है और जब उस वस्तु कि आवश्यकता नहीं रहती तब उसे अपने आवरण से दूर हटा देता है । ठीक इसी तरह जिन कपड़ों की जरूरत नहीं होती उन कपड़ों को धुलाई करके दान कर देना चाहिए।
चरित्र को निर्माण एवं मर्यादित अवस्था को दिख लाने वाले वस्त्र हमारी विशेष पहचान होते हैं। जैसे-जैसे मनुष्य विकसित होता गया उसने अपने बुद्धि के अनुसार अपने कपड़े सुनिश्चित कर लिए। वस्त्र को पोशाक इत्यादि नामों से जाने जाते हैं । हम जैसे वस्त्र पहनते हैं वैसे ही अपने चरित्र का निर्माण करते हैं।
प्रायः सभी क्या करते हैं कि जो पुराने वस्त्र हो जाते हैं उनको भी घर में संभाल कर रख लेते हैं और यह पुराने कपड़ों का भंडारण व्यक्ति कि प्रबंधन क्षमता एवं चारित्रिक नियंत्रण समाप्त होने में सहायक बन जाता है।
कपड़े उतने ही रखें जितने आप संभाल कर रख सकते हैं कपड़े आपकी गिनती में होने चाहिए कपड़े बहुत महत्वपूर्ण योगदान देते हैं आजीविका के प्रदर्शन में व्यक्ति जैसी पोशाक पहनता है व्यक्ति वैसे ही कर्तव्य का पालन करता है। वस्त्र हमारे जीवन में पुरूषार्थ के पर्यायवाची होते है।
जब हम पुराने महापुरुषों की जीवनी पढ़ते हैं तो उनकी मात्रा दो इससे चार पोषक हैं ही होती थी। लेकिन उन महापुरूषों के जीवन में कर्मों का महत्व अधिक होता था।
इस जीवन का महत्वपूर्ण विषय कर्म फल है आप जैसा कर्म करते हैं वैसा ही फल आपको मिलता है।
गिनती करके और व्यवस्थित करें यह आपके प्रबंधन क्षमता में बेहतरीन बदलाव लेकर आएगा।
कपड़े का प्रयोजन शरीर को ढकना । अगर आप ऐसे वस्त्र पहनते हैं जो आपके तन को ढक्का हुआ नहीं रखते तो वह आपके स्वभाव में चरित्रहीनता को ले आते हैं। कपड़े ऐसे पहनने चाहिए जिससे आपका शरीर दिखाई ना दे।
अक्सर कई बार सुनने में आता है कि कपड़े दान में नहीं देते यह मात्र भ्रम की अवस्था होती है यह उनके लिए भी शर्मनाक बात है जो ऐसी गलत सलाह देते हैं।
जिन सलाहकारों के पास सामने वाले के बीमारी का कारण पता नहीं होता तो वह इन सब विषयों पर कारण थोप देते हैं
वस्त्र का काम है मनुष्य का तन ढकना।
वस्त्रों का महत्व है तब तक है जब तक व्यक्ति जीवित है। मरने के बाद कोई काम के नहीं रहते।अगर आपके पास अतिरिक्त कपड़े है जिनको आप नहीं पहना उन्हें धुलाई करके दान कर दीजिए एक बात का ध्यान रखें कि मेला कपड़ा दान ना करें इससे आपको पाप लगेगा आपका मेल किसी को भी दान में नहीं जाना चाहिए।
अक्सर सुना है कि इसका शुक्र भारी है बहुत ज्यादा अंश का है ज्यादा अंश का होना उसे शुक्र के भौतिक सुखों को बढ़ा देता है लेकिन जो ज्यादा बड़ा होता है वह वृद्धावस्था में होता है और जातक के पास ऐसी चीज मिलेगी जो उसके काम की नही है लेकिन वह स्टोरेज करके रखता है कपड़े पहनने का शौक होता है
जितने ज्यादा कपड़े होते हैं व्यक्ति के पास उतने ही ज्यादा कार्य करने के मार्ग होते हैं। मनुष्य पर सबसे ज्यादा प्रभाव उसके आवरण का पड़ता है उसके आवरण में जो वस्तुएं होते हैं जैसे ही व्यवस्था होती है उसे के अनुसार उसकी बुद्धि काम करती है ।
जिस व्यक्ति के निजी जरूरत के समान अधिक होते हैं और अवस्थित होते हैं तो यह स्थिति व्यक्ति की जीवन शैली तथा कार्य क्षमता पर बहुत बुरा प्रभाव डालती हैं।
अगर आप अपनी जरूरत के अनुसार कपड़े रखते हैं तो वह आपके प्रबंधन की क्षमता में वृद्धि करता है जब व्यक्ति के पास अवसर कम होते हैं तो वह अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करता है।
अगर बुद्धि के पटल पर फालतू विचार रहते हैं तो व्यक्ति अपने मस्तिष्क को नियंत्रण में नहीं रख पाता वह अपने कार्य क्षमता को नहीं बढ़ा पता
लेकिन रोजमर्रा की लाइफ में कच्चे में सुराग जरूर मिलता है ऊपर ही दिखावा जो लोग करते हैं उनका ही चरित्र दुष्ट होता है दुष्ट चरित्र की पहचान है वह वास्तविकता से अलग दिखने में विश्वास रखते हैं।
उन मां-बाप को जरूर ध्यान में देना चाहिए जिनके बच्चे बड़े हो रहे हैं उनके पुराने कपड़े अगर आपने इकट्ठा करके रखे हैं तो वह उस बच्चों के चरित्र एवं प्रबंधन क्षमता पर बुरा असर डालते हैं।
बच्चों के कपड़े उतने ही रखें जितने उन्हें जरूरत है। बच्चे जिन कपड़ों को नहीं पहनते हैं उन कपड़ों को तुरंत धुलाई करके दान करें।
जिन पुराने कपड़ों को आप नहीं पहनते हो उनका सबसे उत्तम उपयोग यही है कि उसे कोई ऐसा व्यक्ति पहने जिसके पास पहनने को नहीं है।पुराने कपड़े को धुलाई किया और सुखाकर अलग से रखे।
दान के लिए निकाले गए पुराने कपड़े अलग रखें।
