ज्योतिष कक्षा – 11 नक्षत्र चरण स्वामी परिचय
नक्षत्रं के चार चरण होते हैं और प्रत्येक चरण का स्वामी एक ग्रह होता है।और 27 नक्षत्रो के चरणों कि…
नक्षत्रं के चार चरण होते हैं और प्रत्येक चरण का स्वामी एक ग्रह होता है।और 27 नक्षत्रो के चरणों कि…
मनुष्य जीवन पर नक्षत्र का विशेष प्रभाव होता है नक्षत्र चरण से व्यक्ति के नामकरण किया जाता है और उसका…
पंचक शब्द का शाब्दिक अर्थ है पांच गुणा क्षमता।पंचक शब्द का प्रयोग चंद्र मास में पड़ने वाले अंतिम पांच नक्षत्रो…
आज कि इस ज्योतिष कक्षा – 8 में हम नक्षत्र परिचय के अंतर्गत नक्षत्रो के वृक्ष, नक्षत्रो कि आकृति एवं…
योग सूर्य और चंद्रमा कि परिक्रमा के अनुसार बनने वाले समय को कहा गया है। पृथ्वी कि एक परिक्रमा अपनी…
जो आकाश हमें दिखाई देता है इसको ज्योतिष भाषा में भचक्र के नाम से जाना जाता है और रात्रि कल…
पंचांग का तीसरा अभिन्न अंग है करण। शुभ कार्य का समय सुनिश्चित करते समय करण का ध्यान रखा जाता है।…
ज्योतिष कक्षा - 4 का महत्वपूर्ण बिंदु है पक्ष एवं तिथि। किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले तिथि…
इस पाठ्यक्रम पंचांग शोधन विधि को सिखने के लिए तैयार किया गया है। इसके पाठ्यक्रम इस आधार पर के अंतर्गत…
ज्योतिष कक्षा कि प्रथम कक्षा में ज्योतिष शास्त्र का परिचय बताया गया है,मनुष्य के जीवन में कर्म तथा फल कि…