गुरु अस्तोदय सारणी-विक्रमी संवत् 2082-
सूर्य के प्रकाश के पड़ने से जो चमक हमें गुरु ग्रह पर दिखाई देती है वह इस समय हमें नहीं दिखा दिखाई देती है इस अस्त अवधि में गुरु ग्रह के प्रभाव से होने वाले बदलाव स्थगित हो जाते हैं ।गुरु ग्रह हमारी पृथ्वी को उल्का पिंडों से बचाते हैं इसलिए हम इस ग्रह को अपने जीवन सार में भी गुरु की छवि से ही देखते हैं। बचपन में बच्चों को खुले आसमान में खेलना चाहिए क्योंकि इससे बृहस्पति ग्रह के प्रभाव उनको मिल पाते हैं । अगर छत के नीचे रहते हैं तो उनका प्रभाव बच्चों पर नहीं बना रहता ।
जिस समय यह अस्त रहता है उसे समय शुभ कार्य ज्ञान ग्रहण करना शादी विवाह करना अन्य जीवन के सामाजिक आवरण से जुड़े जितने भी कार्य हैं उनको नहीं किया जाता। जिनकी जन्म कुंडली में गुरु ग्रह अस्त होते हैं वह व्यक्ति ज्ञान से दूर होता है उसकी इच्छा ज्ञान ग्रहण करने की नहीं बन पाती है उसकी क्षमता गुरु से होने वाले बदलाव जीवन में ज्यादा सक्रिय नहीं रह पाते।
- 11-6-2025 को रात्रि 11 बजकर 33 मिनट पर गुरु पश्चिम में अस्त।
- 6-7-2025 को रात्रि बाद प्रातः 4 बजकर 18 मिनट पर पूर्व दिशा में उदय।
