नक्षत्र प्रवेश सारणी- विक्रमी संवत 2082 इस भचक्र को 12 भागों बराबर बराबर अंशों में विभाजित किया गया है। हमारे भचक्र में 360 डिग्री का कोण बनता है और जब हम इसे बराबर अंशों में विभाजित करते हैं तो प्रत्येक भाग 30 डिग्री का बनता है।जिसे हम राशि चक्र कहते हैं। सौरमंडल में घुमाने बाले सभी ग्रह अपनी अपनी धुरी पर परिक्रमा करते हैं और राशि चक्र में राशि परिवर्तन करते हैं। गौचर में ग्रह राशि परिवर्तन करते हुए अपने प्रभाव में भी बदलाव करते हैं। सभी ग्रह अपनी-अपनी दूरी और अपने-अपने भ्रमण कल शक्कर के अनुसार समय पर अपने परिक्रमा पूरी करते हैं और इस राशि चक्र में 27 नक्षत्र भी व्यवस्थित किए गए हैं।

Planet constellation change
Planet constellation change

इनका क्षेत्र एक राशि में चरणों के अनुसार व्यवस्थित है। एक नक्षत्र के चार चरण होते हैं और और एक राशि का क्षेत्र 9 चरणों का होता है ,एक राशि में स्वा दो नक्षत्र होते हैं । राशि अनुसार पड़ने वाले प्रभाव को शुक्ष्म रूप से देखने के लिए नक्षत्र अध्ययन जरूरी है। जब ग्रह ग्रह राशि भ्रमण करते हैं तो उसके अनुरूप मनुष्य के स्वभाव पर पड़ने वाले मुख्य प्रभाव नक्षत्र चरण के स्वामी का होता है और उसके बाद नक्षत्र के स्वामी का और उसके बाद राशि का और स्वामी ग्रह का प्रभाव रहता ।

सौरमंडल में घुमाने बाले सभी ग्रह अपनी अपनी धुरी पर परिक्रमा करते हैं और राशि चक्र में राशि परिवर्तन करते हैं।गौचर में ग्रह राशि परिवर्तन करते हुए अपने प्रभाव में भी बदलाव करते हैं और जब ग्रह नक्षत्र परिवर्तन करता है तो उसके स्वभाव बदलाव आता है। जब ग्रह एक ही राशि में भ्रमण करते समय जब नक्षत्र परिवर्तन करते है तो उसका प्रभाव भी साफ साफ मनुष्य के स्वभाव में दिखाई देता है। इस समय राशि का तू प्रभाव वही बना रहेगा लेकिन नक्षत्र का प्रभाव बदल जाता है।

जन्म कुंडली में ग्रह दशा का आकलन करते समय ग्रहों के फल राशि मे ग्रह कि स्थिति के अनुसार ही कहे गये और ग्रह के स्वभाव के अनुसार ही घटक तथा घटनाओं कि पहचान बताई गई है और शुक्षमता के लिए नक्षत्रों के भ्रमण काल को देखा जाता है। जब ग्रह राशि परिवर्तन करता है तो उसके स्वरूप में भी बदलाव दिखाई देते हैं ।

राशियों के इन प्रभावों को शुक्षमता से देखने के लिए राशि क्षेत्र में नक्षत्र क्षेत्र कि पहचान कर राशि को अधिक गहनतम रूप से जाना जाता है। वर्तमान ग्रह स्थिति के दर्शन के लिए यहां क्लिक करें।

सूर्य नक्षत्र प्रवेश सारणी-

चंद्रमा नक्षत्र प्रवेश सारणी-

मंगल नक्षत्र प्रवेश सारणी-

बुध नक्षत्र प्रवेश सारणी-

बृहस्पति नक्षत्र प्रवेश सारणी-

शुक्र प्रवेश सारणी-

शनि नक्षत्र प्रवेश सारणी-

राहु नक्षत्र प्रवेश सारणी-

केतु नक्षत्र प्रवेश सारणी-