अस्त – उदय सारणी विक्रमी संवत् -2082
जब हमें कोई ग्रह आकाश में चमक था हुआ दिखाई देता है तथा उसका प्रभाव , प्रकाशमय रशमियां हम तक पहुंचती है। वह उस ग्रह का स्वंय का प्रकाश नहीं होता। जब भी किसी ग्रह का प्रभाव हम तक सब पहुंचता है तब वह सूर्य की रोशनी में चमकता है हमें ग्रह चमकता हुआ दिखाई देता हैं ।
परिक्रमा काल में ग्रह कि स्थिति एक समय ऐसी बनती हे कि उन पर सूर्य का प्रकाश नहीं पड़ता और वह उस समय चमकते नहीं है । वह अभी यंत्रों की द्वारा दिखाई तो देते हैं लेकिन वह चमकती भी नहीं दिखाई देते इस अवस्था को अस्त अवस्था कहा गया है।जब ग्रह अस्त हो तो उसका प्रभाव तथा उससे निकलने वाली रश्मियां भी निस्तेजित होती हैं।अस्तोदय सारणी का प्रयोग विशेष मुहूर्त के लिए किया जाता है।