1 अप्रैल 2025 मंगलवार चतुर्थी तिथि, शुक्ल पक्ष चैत्र मास।

नवरात्र मे चौथे दिन नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा का पूजन मां कुष्मांडा के रूप में किया जाता है। माता का यह स्वरूप संसार कि रचना करने के लिए विख्यात है। इनके चेहरे पर हल्की प्रसन्नता सदैव बनी रहती है। पौराणिक कथाओं में वर्णित है अपनी हल्की हंसी के द्वारा अण्ड यानी ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इस देवी को कुष्मांडा नाम से जाना गया है।

कुष्मांडा का अर्थ होता है कुम्हड़ा। जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने ईषत्‌ हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इनको आदि शक्ति भी कहा गया है।

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सूर्य इनका निवास स्थान माना जाता है। इसलिए माता के इस स्वरूप के पीछे सूर्य का तेज दर्शाया जाता है। इनके आठ भुजाएं हैं और सवारी शेर है।

इनके सात हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, कलश, चक्र और गदा है और आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। देवी के हाथ में जो अमृत कलश है। मां के इस स्वरूप का ध्यान करने से वह अपने भक्‍तों को दीर्घायु और उत्तम स्‍वास्‍थ्‍य का वरदान देती हैं।

तेज बुद्धि और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने के लिए मां कुष्मांडा को मालपुए का भोग लगाएं।