नक्षत्र परिचय
जो आकाश हमें दिखाई देता है इसको ज्योतिष भाषा में भचक्र के नाम से जाना जाता है। और रात्रि कल में इस भचक्र में दिखाई देने वाले तारों के समूह को नक्षत्र कहा जाता है। यह खुला आसमान 360 डिग्री का होता हैं। तारामंडल कि स्थिति हमेशा आकाश में एक जैसी ही रहती है लेकिन दिन में सूर्य के प्रकाश के कारण यह हमें दिखाई नहीं देती जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर एक हिस्से पर तब रात्रि कल में यह हमें दिखाई देते हैं।
सनातन संस्कृति में प्राचीन काल से ही समय कि ईकाइयां नक्षत्रों से परिभाषित होने लगी थी।शतपथ ब्राह्मण और तैत्तरीय संहिता में यही क्रम मिलता है। मानव सभ्यता में बौद्धिक विकास ब्रह्मांड कि जानकारी पर आधारित है।उस समय मनुष्य कि चेतना इतनी विकसित हो चुकी थी कि वह अपनी दिनचर्या का प्रयोग ब्रह्मांड कि गतीविधीयो के अनुसार करने लगा था।उदयकाल के अन्तिम भाग में नक्षत्रों के फलाफल में पर्याप्त विकास हो गया था। अथर्ववेद में मूल नक्षत्र में उत्पन्न बालक की दोष-शान्ति के लिए अग्नि आदि देवताओं से प्रार्थनाएं की गयी हैं ।
भचक्र कि 360 डिग्री के अनुसार 27 नक्षत्र में विभाजित किया गया है 27 नक्षत्र में विभाजित करने वाली पद्धति हमारी पुरानी पद्धति है उसके बाद में 27 नक्षत्र को 12 राशियों में विभाजित किया गया है।आकाश में तारामंडल के विभिन्न रूपों में दिखाई देने वाली आकृतियों को नक्षत्र कहते हैं। मूलत: नक्षत्र 28 माने गए हैं। ज्योतिषियों द्वारा एक अन्य अभिजित नक्षत्र भी माना जाता है। ज्योतिष के पुराने लेखों में 88 नक्षत्रों का वर्णन मिलता है लेकिन आज के परिवेश में चंद्रमा की परिक्रमा में आने वाले 27 प्रमुख नक्षत्र हैं। जिनके आधार पर हमारे समय का आकलन किया गया है जब चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर चक्र लगाता है तो जो आवर्ती चंद्रमा द्वारा बनाई जाती हैं ।इसी आवर्ती को 27 भागों में आवंटित किया गया है। भचक्र कि शुरुआत मेष राशि से शुरू करते हुए प्रथम नक्षत्र अश्विनी आता है।
नक्षत्रों की सूची अथर्ववेद, तैत्तिरीय संहिता, और शतपथ ब्राह्मण में दी गई है. नक्षत्र, हिंदू और बौद्ध ज्योतिष में चंद्रमा के मांडलिक क्षेत्र को कहते हैं. नक्षत्र, राशिचक्र के 27 खंडों में से एक होता है. हर नक्षत्र को चार चरणों में बांटा गया है. नक्षत्रों के नाम, संबंधित क्षेत्रों में स्थित किसी प्रमुख तारे या तारामंडल से जुड़े होते हैं।
यह संस्कृत का शब्द नक्षत्र पूरे नभः में जो भी तारा रूपी घटनाक्रम हमें दिखाई देते हैं उन्हें नक्षत्र कहा गया है ।
यह नक्षत्र नाम प्राचीन काल से प्रचलन में है जब नया इतिहास बना तो अंग्रेजी इतिहासकारों ने नक्षत्रों बारे में लिखा।
नक्षत्र शब्द, लैटिन शब्द कॉन्स्टेलाटियो से आया है, जिसका मतलब है । तारों का समूह’. नक्षत्रों के कुछ उदाहरण हैं उन्होंने अपनी सभ्यता से जोड़कर रखें ।उरसा मेजर, ओरियन, लियो, ड्रेको, कर्क आदि।
लैटिन और अंग्रेजी में नक्षत्र से जुड़ा नाम है – Brainly. जिसका हिन्दी में अनुवाद है “तारामंडल” लैटिन शब्द कॉन्स्टेलाटियो से आया है, जिसका अनुवाद “तारों का समूह” के रूप में किया जाने लगा था। यह 14वीं शताब्दी के दौरान अंग्रेजी में अनुवाद किए हुए दस्तावेज मिलते हैं जिसमें उन्होंने अपनी तरह से इनका अनुवाद किया और उनकी जानकारी का सर्वप्रथम जो श्री है इन्होंने लिया लेकिन यह भारत की सनातन संस्कृति से उन भीगी थे बाद में इनको भी पता चल गया कि यह ज्ञान आया कहां से है।
नक्षत्रों के अंग्रेज़ी में ये नाम होते हैं: Star – स्टार, Constellation – कॉन्स्टेलैशन , Asterism-ऐस्टरिज्म, Luminary – ल्यूमिनारी , Planet – प्लैनेट
1 अश्विनी नक्षत्र ।
- भरणी नक्षत्र।
- कृत्तिका नक्षत्र ।
- रोहिणी नक्षत्र।
- मॄगशिरा नक्षत्र।
- आर्द्रा नक्षत्र।
- पुनर्वसु नक्षत्र ।
- पुष्य नक्षत्र।
- अश्लेशा नक्षत्र।
- मघा नक्षत्र ।
- पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र।
- उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र ।
- हस्त नक्षत्र ।
- चित्रा नक्षत्र ।
- स्वाती नक्षत्र ।
- विशाखा नक्षत्र।
- अनुराधा नक्षत्र।
- ज्येष्ठा नक्षत्र ।
- मूल नक्षत्र ।
- पूर्वाषाढा नक्षत्र।
- उत्तराषाढा नक्षत्र।
- श्रवण नक्षत्र ।
23 धनिष्ठा नक्षत्र । - शतभिषा नक्षत्र ।
- पूर्व भाद्रपद नक्षत्र।
- उत्तर भाद्रपद नक्षत्र।
27 रेवती नक्षत्र